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बचपन शायरी :_बचपन के दिन भी कितने अच्छे होते थे,तब दिल नहीं सिर्फ खिलौने टूटा करते थे,अब तो एक आंसू भी बर्दाश्त नहीं होता,और बचपन में जी भरकर रोया करते थे।

बचपन के दिन भी,  कितने अच्छे होते थे; तब दिल नहीं सिर्फ ,  खिलौने टूटा करते थे।॥ पर अब तो , एक आंसू ,  भी बर्दाश्त नहीं होता; और बचपन में हम ,  जी भरकर रोया करते थे।।